ब्रेकिंग
कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में AI-मीडिया शोध केंद्र की शुरुआत, राज्यपाल डेका ने दिया पत्रकारिता का ... छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट; बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारि... फ्लाइट बंद होने के बीच राहत की खबर, बिलासपुर से Fly91 भर सकती है उड़ान भिलाई में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; दो युवकों की मौत लखनऊ में पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति का पहला स्थापना दिवस, 17 राज्यों के पत्रकारों ने दिखाया एकजुटता ... CG News:- लूट के माल के बंटवारे पर गैंग में घमासान! मारपीट ने खोला पूरा राज, रीवा से आई पिस्टल से लू... छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर-बिलासपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य का सम्मान, छत्तीसगढ़ के 64 शिक्षकों को राज्यपाल करेंगे सम्मानित दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई बाइक; दो नाबालिगों की मौके पर मौत कर्ज वसूली के नाम पर बर्बरता, महिला और बेटे को बंधक बनाकर पीटा; निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने का आरोप
छत्तीसगढ़दुर्ग

रेलवे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, एसडीएम को सौंपा कलेक्टर के नाम ज्ञापन

दुर्ग : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) की प्रस्तावित खरसिया–नया रायपुर–परमलकसा रेल परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के विरोध में मंगलवार को 300 से अधिक प्रभावित किसान और ग्रामीण सामूहिक रूप से जिला कलेक्टर कार्यालय, दुर्ग पहुंचे। उन्होंने अपनी आपत्तियाँ और मांगें दर्ज कराते हुए दुर्ग शहर एसडीएम हितेश पिस्दा को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर, दुर्ग को संबोधित था।

यह विरोध रेलवे परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित किया गया। समिति ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को “अपारदर्शी, एकतरफा और मनमाना” बताते हुए 20 अगस्त 2025 को जारी प्रतिबंध आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। इस आदेश के तहत प्रभावित क्षेत्रों की भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन और खरीदी-बिक्री पर रोक लगाई गई है।

किसानों की प्रमुख आपत्तियाँ और मांगें

पुश्तैनी भूमि न देने का संकल्प:
किसानों ने सर्वसम्मति से घोषणा की कि उनकी कृषि योग्य पुश्तैनी भूमि, जो आजीविका का एकमात्र साधन है, किसी भी परिस्थिति में परियोजना के लिए नहीं दी जाएगी।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन:
किसानों का कहना है कि प्रतिबंध आदेश बिना किसी पूर्व सूचना, ग्रामसभा की बैठक या प्रभावितों की सहमति के जारी किया गया, जो संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है।

पारदर्शिता का अभाव:
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने अब तक परियोजना का स्पष्ट संरेखण मानचित्र, मुआवजा निर्धारण की नीति और पुनर्वास योजना का कोई विवरण साझा नहीं किया है, जिससे व्यापक असंतोष व्याप्त है।

खुली जनसुनवाई की मांग:
किसानों ने कलेक्टर से मांग की कि अधिग्रहण से जुड़ी सभी जानकारियाँ — संरेखण मानचित्र, मुआवजा नीति और सर्वेक्षण आदेश — सार्वजनिक की जाएँ तथा सभी प्रभावित ग्रामों में खुली एवं निष्पक्ष जनसुनवाई आयोजित की जाए।

रेलवे परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के संयोजक ढालेश साहू ने कहा

हम अपनी पुश्तैनी जमीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। यह जमीन ही हमारी आजीविका और पहचान है। प्रशासन ने बिना ग्रामसभा की अनुमति और प्रभावित किसानों की राय लिए प्रतिबंध आदेश जारी किया है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। जब तक हमारी आपत्तियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और प्रतिबंध आदेश निरस्त नहीं किया जाता, तब तक किसान चुप नहीं बैठेंगे।”

ज्ञापन सौंपने के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी उचित मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसानों ने अपने समर्थन में हस्ताक्षर युक्त सूची और 20 अगस्त 2025 के प्रतिबंध आदेश की प्रति भी ज्ञापन के साथ संलग्न की है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button